जिले की मंडियों में अगले महीने से धान की आवक होने की संभावना है, लेकिन किसानों के सामने सरकारी खरीद को लेकर स्पष्टता का अभाव है। इसके कारण किसानों में रोष और असमंजस की स्थिति उत्पन्न हो गई है।
किसानों का कहना है कि हर साल खरीफ के मौसम में उन्हें अपनी फसल बेचने के लिए सरकारी खरीद केंद्रों पर निर्भर रहना पड़ता है। लेकिन इस बार सरकार ने अभी तक सरकारी खरीद की योजना और तिथियां घोषित नहीं की हैं। किसानों का आरोप है कि यदि समय रहते योजना और खरीद प्रक्रिया स्पष्ट नहीं हुई, तो उन्हें अपने धान के लिए उचित मूल्य नहीं मिल सकेगा।
स्थानीय किसान संघ के पदाधिकारी ने बताया कि मंडियों में किसानों की तैयारियां पहले से ही पूरी हैं। उन्होंने कहा, “हमने बीज, उर्वरक और अन्य कृषि सामग्री की लागत पहले ही वहन कर ली है। अब सरकारी खरीद के स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं आने से हम चिंतित हैं। अगर कीमतों और प्रक्रिया की जानकारी समय पर नहीं मिली, तो हमारे आर्थिक नुकसान की संभावना है।”
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि धान की खरीफ फसल के लिए सरकार की तैयारी और खरीद प्रक्रिया का समय पर निर्धारण अत्यंत महत्वपूर्ण है। इससे न केवल किसानों को लाभ मिलेगा, बल्कि मंडियों में भी सही समय पर फसल की आवक सुनिश्चित होगी।
हनुमानगढ़ जिले में हर साल सरकारी खरीद केंद्रों के माध्यम से किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर धान की खरीद की जाती है। लेकिन इस बार किसानों ने बताया कि केंद्रों पर पर्याप्त स्टाफ और अवसंरचना की तैयारी का भी अभाव है। इससे डर है कि आवक के समय लंबी कतारें और समय की हानि जैसी समस्याएं सामने आएंगी।
किसानों ने जिला प्रशासन और राज्य सरकार से अपील की है कि सरकारी खरीद की तिथियां और प्रक्रिया जल्द से जल्द स्पष्ट करें। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर शीघ्रता नहीं दिखाई गई, तो किसान आंदोलन की संभावना भी बनी हुई है।
मंडी प्रशासन के अधिकारी ने कहा कि सरकार द्वारा जल्द ही खरीद तिथियों और केंद्रों के बारे में घोषणा की जाएगी। उन्होंने आश्वस्त किया कि किसानों को उचित मूल्य और सुविधाजनक प्रक्रिया के माध्यम से फसल बेचने का अवसर मिलेगा।
किसानों में चिंता और असंतोष का मुख्य कारण यह है कि फसल की लागत पहले ही बढ़ गई है। उर्वरक और मजदूरी की बढ़ती कीमतों के चलते किसानों को सरकार द्वारा घोषित MSP पर सही समय पर भुगतान मिलना उनके लिए जरूरी है।
हनुमानगढ़ में इस समय किसानों की नजर मंडियों और सरकारी घोषणाओं पर है। उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया है कि वे उनकी समस्याओं को गंभीरता से लें और धान की आवक के पहले सभी जरूरी इंतजाम सुनिश्चित करें।
इस प्रकार, सरकारी खरीद की स्पष्ट तस्वीर न होने के कारण हनुमानगढ़ के किसान न केवल अपनी फसल के उचित मूल्य के लिए चिंतित हैं, बल्कि भविष्य की तैयारी और आर्थिक योजना पर भी प्रभाव महसूस कर रहे हैं।
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